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COMMUNICATION TODAY

Media Quarterly (Journal)

(Lighthouse of Media Professionals)
A Double-Blind Peer-Reviewed Bilingual Media Quarterly

202nd National Webinar | Mar 07, 2026

🌿 On the Eve of International Women’s Day

📅 Date: Saturday | Mar 07, 2026
🕠 Time: 5:30 PM onwards
💻 Mode: Online (Webinar)
🟢 Organised by: Communication Today (Quarterly Media Journal, Jaipur)
🤝 In collaboration with: Bharati Vidyapeeth, New Delhi
🎯 Subject: Give To Gain (The theme for International Women’s Day’s 2026)


📢 Eminent Scholar:

  • Dr. Rupa Kumari
    Assistant Professor
    Faculty of Journalism and Mass Communication
    Usha Martin University
    Ranchi, Jharkhand

🗓 Schedule:
🔹 Login & Networking: 5:30 PM – 6:00 PM
🔹 Experts’ Talks: 6:00 PM – 7:15 PM
🔹 Discussion & Certification: From 7:15 PM onward

🔗 Join the Webinar:
👉 Webinar Link: https://bvicam.webex.com/meet/webinar
📺 Live Streaming on YouTube:
👉 https://www.youtube.com/channel/UCuOPY-98JUY9T2igRpj8tIQ/featured
📝 Advance Registration (Free):
👉 https://bvicam.ac.in/MediaSeries/

📄 Get Your Certificate:
Fill the feedback form at the end of the webinar. The certificate will be auto-generated and free of cost.

🎥 Missed the last session?
📌 Watch the 201st Webinar Recording:
👉 https://youtu.be/_kF-r3BDmjI
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With warm regards,
Prof. Sanjeev Bhanawat Editor, Communication Today, Jaipur
Prof. M. N. Hoda Director, Bharati Vidyapeeth, New Delhi

201st National Webinar | Fab 28, 2026

201वाँ राष्ट्रीय वेबिनार
विषय
: Media’s Mission: Science, Society & Sustainability
आयोजक: कम्युनिकेशन टुडे एवं भारती विद्यापीठ, नई दिल्ली
दिनांक: शनिवार, 28 फरवरी 2026

जयपुर से प्रकाशित प्रतिष्ठित मीडिया त्रैमासिक कम्युनिकेशन टुडे तथा भारती विद्यापीठ, नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 201वें राष्ट्रीय वेबिनार में “Media’s Mission: Science, Society & Sustainability” विषय पर गंभीर, समसामयिक और दूरदर्शी विमर्श संपन्न हुआ। वेबिनार श्रृंखला का यह चरण केवल एक अंक की वृद्धि नहीं, बल्कि डिजिटल युग में मीडिया की बदलती भूमिका का सशक्त दस्तावेज बनकर उभरा।

मुख्य वक्ता के रूप में दिल्ली स्थित विवेकानंद प्रोफेशनल स्टडीज़ इंस्टीट्यूट–टेक्निकल कैंपस के विवेकानंद स्कूल ऑफ जर्नलिज़्म एंड मास कम्युनिकेशन में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अनुराधा मिश्रा ने अपने व्याख्यान में कहा कि विज्ञान प्रयोगशालाओं तक सीमित अवधारणा नहीं है, बल्कि यह समाज के दैनिक जीवन, नीतिगत निर्णयों और राष्ट्र के भविष्य से गहराई से जुड़ा हुआ है। उन्होंने भारतीय संविधान में निहित वैज्ञानिक दृष्टिकोण को नागरिक कर्तव्य बताते हुए इसरो की उपलब्धियों, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (आधार और यूपीआई) तथा कोविड-19 टीकाकरण अभियान का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक नवाचार तभी सार्थक सिद्ध होते हैं जब समाज का विश्वास, सहभागिता और संवाद उनके साथ जुड़ा हो।

डॉ. मिश्रा ने सतत विकास को वर्तमान समय की अनिवार्य आवश्यकता बताते हुए नवीकरणीय ऊर्जा, जल संरक्षण, जैविक कृषि, मिलेट्स के पुनरुत्थान तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित कृषि समाधानों को भारत की आत्मनिर्भर और पर्यावरण-संवेदनशील दिशा के महत्वपूर्ण आयाम बताया। साथ ही, जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण और चरम मौसम की चुनौतियों के प्रति सामूहिक और त्वरित कार्रवाई की आवश्यकता पर बल दिया।

मीडिया की भूमिका को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण के प्रसार, मिथ्या सूचना पर नियंत्रण और सतत विकास के एजेंडा को जन-जन तक पहुँचाने में मीडिया की केंद्रीय भूमिका है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, अंतर्विषयी अध्ययन, पारंपरिक ज्ञान के समावेशन और नैतिक एआई विकास को भविष्य की दिशा के रूप में चिन्हित किया गया।

कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए राजस्थान विश्वविद्यालय के जनसंचार केंद्र के पूर्व अध्यक्ष एवं कम्युनिकेशन टुडे के संपादक प्रो. संजीव भानावत ने कहा कि आज का मीडिया केवल सूचना का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का सशक्त उपकरण है। उन्होंने कहा कि फेक न्यूज़ और दुष्प्रचार के इस दौर में वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देना मीडिया की नैतिक जिम्मेदारी है।

उन्होंने मीडिया से आग्रह किया कि वह तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग, पर्यावरणीय मुद्दों और सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को प्राथमिकता दे तथा जलवायु परिवर्तन, सार्वजनिक स्वास्थ्य और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे विषयों पर सरल, संतुलित और उत्तरदायी संवाद स्थापित करे।

कार्यक्रम के प्रारंभ में भारती विद्यापीठ की सहायक प्राध्यापक सुश्री प्रियंका सिंह ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत कर आयोजन को गरिमा प्रदान की। तत्पश्चात वक्ताओं को ई-पुस्तक एवं ई-स्मृति-चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया। आयोजन की सफलता में जयंत राठी, पुष्पेंद्र सिंह, डॉ. सुनील कुमार, अंबुश (भारती विद्यापीठ) तथा डॉ. पृथ्वी सेंगर (आईआईएमटी विश्वविद्यालय, मेरठ) का उल्लेखनीय योगदान रहा।

अंत में प्रतिभागियों से अपील की गई कि वे इस सार्थक विमर्श को व्यापक स्तर पर साझा करें तथा वेबिनार वीडियो को ‘पसंद’, ‘टिप्पणी’, ‘साझा’ और ‘सब्सक्राइब’ कर आगामी आयोजनों से जुड़े रहें। यह 201वाँ राष्ट्रीय वेबिनार केवल एक उपलब्धि नहीं, बल्कि विज्ञान, समाज और मीडिया के त्रिवेणी-संगम की सशक्त उद्घोषणा सिद्ध हुआ।

Special Moments

डॉ महेंद्र भानावत

लोकपरंपराओं के अडिग प्रहरी को अंतिम प्रणाम

लोक साहित्य, परंपराओं और संस्कृति के महान संरक्षक डॉ. महेंद्र भानावत का निधन एक अपूरणीय क्षति है। उन्होंने अपने जीवन को भारतीय लोककथाओं, लोकगीतों, कठपुतली कला और परंपरागत लोकसंस्कृति के संरक्षण और संवर्धन में समर्पित किया। उनके लेखन का विस्तार अत्यंत व्यापक था—उन्होंने लगभग 100 पुस्तकें लिखीं, 10,000 से अधिक लेख प्रकाशित किए और अपने विशिष्ट कार्यों के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के 80 से अधिक पुरस्कार प्राप्त किए।

डॉ. भानावत ने लोकसंस्कृति को शोधपरक दृष्टि से प्रस्तुत कर उसे नई पहचान दिलाई। उनकी विद्वता, सरलता और समर्पण भाव ने उन्हें लोकसंस्कृति जगत में एक विशिष्ट स्थान दिलाया।

आज उनके उड़ावणा के अवसर पर हम उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। उनके विचार और कार्य सदा अमर रहेंगे।

➡ यह वीडियो अगर आपको पसंद आए तो चैनल को सब्सक्राइब करें, शेयर करें और अपनी श्रद्धांजलि व्यक्त करें।

एक मुलाकातः रीना अशोक जारोली से

प्रेम की मिसाल: पति को किडनी दान और कैंसर से संघर्ष

कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रही एक महिला के लिए जीवन पहले से ही एक चुनौती बन जाता है। ऐसे में इस महिला ने न केवल अपनी बीमारी से संघर्ष किया, बल्कि अपने पति के जीवन को बचाने के लिए उसे अपनी किडनी भी दान कर दी। यह निर्णय न केवल साहस और निस्वार्थता का परिचायक है, बल्कि यह हमें मानवीय शक्ति और करुणा की गहराई का भी अहसास कराता है।

इस कहानी के विभिन्न आयाम हैं। पहला आयाम है, संघर्ष और विजय का। कैंसर जैसी बीमारी से लड़ते हुए, शारीरिक और मानसिक रूप से सक्षम बने रहना, और उसके बावजूद अपने पति की ज़रूरत को प्राथमिकता देना अद्वितीय साहस का उदाहरण है। यह महिला न केवल एक योद्धा है, बल्कि एक ऐसी प्रेरणा है, जो हमें सिखाती है कि कठिनाइयों के बावजूद भी हम दूसरों के लिए कितनी बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।

दूसरा आयाम है, निस्वार्थ प्रेम और समर्पण का। पति-पत्नी के रिश्ते की यह कहानी हमें यह दिखाती है कि सच्चे प्रेम और समर्पण में कोई सीमा नहीं होती। यह महिला हमें यह सिखाती है कि प्रेम केवल शब्दों में नहीं, बल्कि कर्मों में भी व्यक्त होता है।

Latest News

कुलपति प्रो० सतपाल बिष्ट ने त्रैमासिक जर्नल कम्युनिकेशन टुडे का किया लोकार्पण

कहा फेक न्यूज़ की बढ़ती प्रवृत्ति के दौर में मीडिया लिटरेसी आज की महती आवश्यकता
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