

COMMUNICATION TODAY
Media Quarterly (Journal)
(Lighthouse of Media Professionals)
A Double-Blind Peer-Reviewed Bilingual Media Quarterly
201st National Webinar | Fab 28, 2026

🌿 National Science Day Special
📅 Date: Saturday | Fab 28, 2026
🕠 Time: 5:30 PM onwards
💻 Mode: Online (Webinar)
🟢 Organised by: Communication Today (Quarterly Media Journal, Jaipur)
🤝 In collaboration with: Bharati Vidyapeeth, New Delhi
🎯 Subject: Media’s Mission: Science, Society & Sustainability
📢 Eminent Scholar:
- Dr. Anuradha Mishra
Associate Professor
Vivekananda School of Journalism & Mass Communication
Vivekananda Institute of Professional Studies – Technical Campus
(Affiliated to GGSIP University, Delhi)
🗓 Schedule:
🔹 Login & Networking: 5:30 PM – 6:00 PM
🔹 Experts’ Talks: 6:00 PM – 7:15 PM
🔹 Discussion & Certification: From 7:15 PM onward
🔗 Join the Webinar:
👉 Webinar Link: https://bvicam.webex.com/meet/webinar
📺 Live Streaming on YouTube:
👉 https://www.youtube.com/channel/UCuOPY-98JUY9T2igRpj8tIQ/featured
📝 Advance Registration (Free):
👉 https://bvicam.ac.in/MediaSeries/
📄 Get Your Certificate:
Fill the feedback form at the end of the webinar. The certificate will be auto-generated and free of cost.
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👉 https://youtu.be/WEAvQPzTz68
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With warm regards,
Prof. Sanjeev Bhanawat Editor, Communication Today, Jaipur
Prof. M. N. Hoda Director, Bharati Vidyapeeth, New Delhi
200th National Webinar | Fab 24, 2026
200वाँ राष्ट्रीय वेबिनार
विषय: एआई और भविष्य की पत्रकारिता
आयोजक: कम्युनिकेशन टुडे एवं भारती विद्यापीठ, नई दिल्ली
दिनांक: मंगलवार, 24 फरवरी, 2026
जयपुर से प्रकाशित प्रतिष्ठित मीडिया त्रैमासिक कम्युनिकेशन टुडे तथा भारती विद्यापीठ, नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 200वें राष्ट्रीय वेबिनार में “एआई और भविष्य की पत्रकारिता” विषय पर अत्यंत गंभीर, समसामयिक और दूरगामी महत्व का विमर्श संपन्न हुआ। वेबिनार श्रृंखला का यह ‘द्विशतक’ केवल एक संख्या नहीं, बल्कि डिजिटल युग में पत्रकारिता के बदलते स्वरूप का ऐतिहासिक दस्तावेज सिद्ध हुआ।
मुख्य वक्ता के रूप में अमर उजाला वेब सर्विस प्राइवेट लिमिटेड के डिजिटल प्रमुख एवं संपादक श्री जयदीप कर्णिक ने कहा कि तकनीक आज जीवन के प्रत्येक क्षेत्र को प्रभावित कर रही है और पत्रकारिता भी इससे अछूती नहीं है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की तुलना उन्होंने एक शेर से करते हुए कहा—
“यदि आप शेर पर सवार हैं तो यह रोमांचक और आनंददायक अनुभव है, लेकिन यदि शेर आप पर सवार हो जाए तो स्थिति अत्यंत चुनौतीपूर्ण हो सकती है।”
उन्होंने स्पष्ट किया कि एआई पर नियंत्रण पत्रकार के हाथ में होना चाहिए, न कि पत्रकार एआई के नियंत्रण में। एआई को उपकरण के रूप में अपनाना चाहिए, विकल्प के रूप में नहीं।
श्री कर्णिक ने कहा कि पत्रकार केवल सूचना का संवाहक नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने वाला चिंतक होता है। सच्चा पत्रकार ‘आउट ऑफ द बॉक्स’ सोचता है, प्रश्न करता है और जनहित को केंद्र में रखकर कार्य करता है। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि आज ‘फैक्ट-चेक’ को केवल डिजिटल मीडिया से जोड़कर देखा जा रहा है, जबकि तथ्य-जांच तो पत्रकारिता की मूल आत्मा रही है। माध्यम चाहे प्रिंट हो, रेडियो या टेलीविजन—समाचार की सत्यता की पुष्टि सदैव पत्रकार की प्राथमिक जिम्मेदारी रही है। डिजिटल युग ने केवल गति बढ़ाई है, दायित्व नहीं घटाया।
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि एआई के माध्यम से पत्रकार रूटीन और दोहराव वाले कार्य—जैसे डेटा विश्लेषण, ट्रांसक्रिप्शन, प्रारंभिक ड्राफ्ट तैयार करना—कम समय में कर सकते हैं। इससे उन्हें रचनात्मक, विश्लेषणात्मक और खोजी पत्रकारिता के लिए अधिक समय मिल सकता है। उनके अनुसार एआई एक अनिवार्य क्रांति है—इसे रोका नहीं जा सकता, परंतु इसे विवेक और नैतिकता के साथ दिशा दी जा सकती है। पत्रकारिता का भविष्य तकनीक से संघर्ष में नहीं, बल्कि संतुलित सह-अस्तित्व में है।
कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए राजस्थान विश्वविद्यालय के जनसंचार केंद्र के पूर्व अध्यक्ष एवं कम्युनिकेशन टुडे के संपादक प्रो. संजीव भानावत ने कहा कि एआई पत्रकारिता का अंत नहीं, बल्कि उसका पुनर्जागरण है। यह तकनीक पत्रकारिता को अधिक तीव्र, सटीक और डेटा-सक्षम बना रही है, किंतु साथ ही नैतिकता, पारदर्शिता और सत्य की कसौटी को और कठोर बना रही है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि भविष्य का पत्रकार केवल रिपोर्टर नहीं होगा, बल्कि डेटा विश्लेषक, तकनीक-सक्षम सृजनकर्ता और तथ्य-जांच का सजग प्रहरी होगा। डीपफेक, एल्गोरिद्मिक पक्षपात और ‘इको चैंबर’ जैसी चुनौतियाँ हमें चेतावनी देती हैं कि तकनीक पर नियंत्रण हमारा रहे। पत्रकारिता की वास्तविक शक्ति मानवीय संवेदना, आलोचनात्मक दृष्टि और सामाजिक उत्तरदायित्व में निहित है—और यही गुण उसे भविष्य में भी प्रासंगिक बनाए रखेंगे।
कार्यक्रम के प्रारंभ में भारती विद्यापीठ की सहायक प्राध्यापक सुश्री प्रियंका सिंह ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत कर आयोजन को गरिमा प्रदान की। तत्पश्चात वक्ताओं को ई-पुस्तक एवं ई-स्मृति-चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया। आयोजन की सफलता में जयंत राठी, पुष्पेंद्र सिंह, डॉ. सुनील कुमार, अंबुश (भारती विद्यापीठ) तथा डॉ. पृथ्वी सेंगर (आईआईएमटी विश्वविद्यालय, मेरठ) का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
अंत में सभी प्रतिभागियों और दर्शकों से आग्रह किया गया कि वे इस सार्थक विमर्श को व्यापक स्तर पर साझा करें तथा वीडियो को ‘पसंद’, ‘टिप्पणी’, ‘साझा’ और ‘सब्सक्राइब’ कर आगामी वेबिनारों से जुड़े रहें।
यह 200वाँ राष्ट्रीय वेबिनार केवल एक उपलब्धि नहीं, बल्कि तकनीक और पत्रकारिता के संगम पर खड़े एक नए युग की सशक्त उद्घोषणा था।
Special Moments
डॉ महेंद्र भानावत
लोकपरंपराओं के अडिग प्रहरी को अंतिम प्रणाम
लोक साहित्य, परंपराओं और संस्कृति के महान संरक्षक डॉ. महेंद्र भानावत का निधन एक अपूरणीय क्षति है। उन्होंने अपने जीवन को भारतीय लोककथाओं, लोकगीतों, कठपुतली कला और परंपरागत लोकसंस्कृति के संरक्षण और संवर्धन में समर्पित किया। उनके लेखन का विस्तार अत्यंत व्यापक था—उन्होंने लगभग 100 पुस्तकें लिखीं, 10,000 से अधिक लेख प्रकाशित किए और अपने विशिष्ट कार्यों के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के 80 से अधिक पुरस्कार प्राप्त किए।
डॉ. भानावत ने लोकसंस्कृति को शोधपरक दृष्टि से प्रस्तुत कर उसे नई पहचान दिलाई। उनकी विद्वता, सरलता और समर्पण भाव ने उन्हें लोकसंस्कृति जगत में एक विशिष्ट स्थान दिलाया।
आज उनके उड़ावणा के अवसर पर हम उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। उनके विचार और कार्य सदा अमर रहेंगे।
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एक मुलाकातः रीना अशोक जारोली से
प्रेम की मिसाल: पति को किडनी दान और कैंसर से संघर्ष
कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रही एक महिला के लिए जीवन पहले से ही एक चुनौती बन जाता है। ऐसे में इस महिला ने न केवल अपनी बीमारी से संघर्ष किया, बल्कि अपने पति के जीवन को बचाने के लिए उसे अपनी किडनी भी दान कर दी। यह निर्णय न केवल साहस और निस्वार्थता का परिचायक है, बल्कि यह हमें मानवीय शक्ति और करुणा की गहराई का भी अहसास कराता है।
इस कहानी के विभिन्न आयाम हैं। पहला आयाम है, संघर्ष और विजय का। कैंसर जैसी बीमारी से लड़ते हुए, शारीरिक और मानसिक रूप से सक्षम बने रहना, और उसके बावजूद अपने पति की ज़रूरत को प्राथमिकता देना अद्वितीय साहस का उदाहरण है। यह महिला न केवल एक योद्धा है, बल्कि एक ऐसी प्रेरणा है, जो हमें सिखाती है कि कठिनाइयों के बावजूद भी हम दूसरों के लिए कितनी बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।
दूसरा आयाम है, निस्वार्थ प्रेम और समर्पण का। पति-पत्नी के रिश्ते की यह कहानी हमें यह दिखाती है कि सच्चे प्रेम और समर्पण में कोई सीमा नहीं होती। यह महिला हमें यह सिखाती है कि प्रेम केवल शब्दों में नहीं, बल्कि कर्मों में भी व्यक्त होता है।

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