

COMMUNICATION TODAY
Media Quarterly (Journal)
(Lighthouse of Media Professionals)
A Double-Blind Peer-Reviewed Bilingual Media Quarterly
200th National Webinar | Fab 24, 2026

A HISTORIC MILESTONE: THE 200th MEDIA LECTURE!
📅 Date: Tuesday | Fab 24, 2026
🕠 Time: 5:30 PM onwards
💻 Mode: Online (Webinar)
🟢 Organised by: Communication Today (Quarterly Media Journal, Jaipur)
🤝 In collaboration with: Bharati Vidyapeeth, New Delhi
🎯 Subject: AI & The Future of Journalism
📝 For hands-on experience, participants may join the workshop with laptop/PC
📢 Eminent Scholar:
- Shri Jaideep Karnik
Head of Digital & Editor,
Amar Ujala Web Service Pvt. Ltd.
🗓 Schedule:
🔹 Login & Networking: 5:30 PM – 6:00 PM
🔹 Experts’ Talks: 6:00 PM – 7:15 PM
🔹 Discussion & Certification: From 7:15 PM onward
🔗 Join the Webinar:
👉 https://bvicam.webex.com/meet/webinar
📺 Live Streaming on YouTube:
👉 https://www.youtube.com/channel/UCuOPY-98JUY9T2igRpj8tIQ/featured
📝 Advance Registration (Free):
👉 https://bvicam.ac.in/MediaSeries/
📄 Get Your Certificate:
Fill the feedback form at the end of the webinar. The certificate will be auto-generated and free of cost.
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With warm regards,
Prof. Sanjeev Bhanawat Editor, Communication Today, Jaipur
Prof. M. N. Hoda Director, Bharati Vidyapeeth, New Delhi
199th National Webinar | Fab 16, 2026
199वां राष्ट्रीय वेबिनार
विषय: Review of Literature with AI Tools
आयोजक: कम्युनिकेशन टुडे एवं भारती विद्यापीठ, नई दिल्ली
दिनांक: सोमवार 16 फरवरी, 2026
जयपुर से प्रकाशित प्रतिष्ठित मीडिया त्रैमासिक कम्युनिकेशन टुडे तथा भारती विद्यापीठ, नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 199वें राष्ट्रीय वेबिनार में “Review of Literature with AI Tools” विषय पर अत्यंत गंभीर, विचारोत्तेजक और समकालीन विमर्श संपन्न हुआ।
नॉर्थ ईस्टर्न हिल यूनिवर्सिटी (NEHU), शिलांग, मेघालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग में प्रोफेसर डॉ. मानश प्रतिम गोस्वामी ने अपने व्याख्यान में स्पष्ट किया कि एआई टूल्स की सहायता से शोध का महीनों का कार्य अब कुछ ही सप्ताह या दिनों में सुव्यवस्थित ढंग से पूरा किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि साहित्य समीक्षा मूलतः खोज, विश्लेषण और व्याख्या की प्रक्रिया है, परंतु डिजिटल युग में इसे अधिक व्यवस्थित और तेज़ बनाने के लिए उन्नत टूल्स उपलब्ध हैं।
उन्होंने विशेष रूप से Semantic Scholar, Consensus, Research Rabbit और Scispace जैसे एआई प्लेटफ़ॉर्म्स का उल्लेख किया, जो शोधपत्रों की खोज, सार-संक्षेप, संदर्भ मैपिंग और शोध-गैप की पहचान में अत्यंत सहायक हैं।
हालाँकि उन्होंने शोधार्थियों को सावधान करते हुए कहा कि एआई पर पूर्ण निर्भरता उचित नहीं है। ये टूल्स केवल सहायक (assistants) हैं, निर्णायक (masters) नहीं। अंतिम विश्लेषण, आलोचनात्मक सोच और वैचारिक स्पष्टता शोधकर्ता की अपनी बौद्धिक क्षमता से ही आती है।
कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए राजस्थान विश्वविद्यालय के जनसंचार केंद्र के पूर्व अध्यक्ष एवं कम्युनिकेशन टुडे के संपादक प्रो. संजीव भानावत ने स्पष्ट किया कि साहित्य समीक्षा केवल स्रोतों की सूची तैयार करना नहीं, बल्कि विचारों की आलोचनात्मक समझ विकसित करना है। एआई सहायक है, विकल्प नहीं। शोध की गुणवत्ता तभी बनी रहेगी जब तकनीक का उपयोग आलोचनात्मक सोच, नैतिकता और मौलिकता के साथ किया जाए।
कार्यक्रम में भारती विद्यापीठ की सहायक प्राध्यापक प्रियंका सिंह ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की तथा वक्ताओं को ई-बुक एवं ई-स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया। आयोजन में जयंत राठी, पुष्पेंद्र सिंह, डॉ. सुनील कुमार, अंबुश (भारती विद्यापीठ) एवं डॉ. पृथ्वी सेंगर (IIMT विश्वविद्यालय, मेरठ) का महत्वपूर्ण सहयोग रहा।
अंत में दर्शकों से वीडियो को Like, Comment, Share और Subscribe करने का अनुरोध किया गया, ताकि वे भविष्य के सार्थक वेबिनारों से जुड़े रह सकें।
Special Moments
डॉ महेंद्र भानावत
लोकपरंपराओं के अडिग प्रहरी को अंतिम प्रणाम
लोक साहित्य, परंपराओं और संस्कृति के महान संरक्षक डॉ. महेंद्र भानावत का निधन एक अपूरणीय क्षति है। उन्होंने अपने जीवन को भारतीय लोककथाओं, लोकगीतों, कठपुतली कला और परंपरागत लोकसंस्कृति के संरक्षण और संवर्धन में समर्पित किया। उनके लेखन का विस्तार अत्यंत व्यापक था—उन्होंने लगभग 100 पुस्तकें लिखीं, 10,000 से अधिक लेख प्रकाशित किए और अपने विशिष्ट कार्यों के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के 80 से अधिक पुरस्कार प्राप्त किए।
डॉ. भानावत ने लोकसंस्कृति को शोधपरक दृष्टि से प्रस्तुत कर उसे नई पहचान दिलाई। उनकी विद्वता, सरलता और समर्पण भाव ने उन्हें लोकसंस्कृति जगत में एक विशिष्ट स्थान दिलाया।
आज उनके उड़ावणा के अवसर पर हम उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। उनके विचार और कार्य सदा अमर रहेंगे।
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एक मुलाकातः रीना अशोक जारोली से
प्रेम की मिसाल: पति को किडनी दान और कैंसर से संघर्ष
कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रही एक महिला के लिए जीवन पहले से ही एक चुनौती बन जाता है। ऐसे में इस महिला ने न केवल अपनी बीमारी से संघर्ष किया, बल्कि अपने पति के जीवन को बचाने के लिए उसे अपनी किडनी भी दान कर दी। यह निर्णय न केवल साहस और निस्वार्थता का परिचायक है, बल्कि यह हमें मानवीय शक्ति और करुणा की गहराई का भी अहसास कराता है।
इस कहानी के विभिन्न आयाम हैं। पहला आयाम है, संघर्ष और विजय का। कैंसर जैसी बीमारी से लड़ते हुए, शारीरिक और मानसिक रूप से सक्षम बने रहना, और उसके बावजूद अपने पति की ज़रूरत को प्राथमिकता देना अद्वितीय साहस का उदाहरण है। यह महिला न केवल एक योद्धा है, बल्कि एक ऐसी प्रेरणा है, जो हमें सिखाती है कि कठिनाइयों के बावजूद भी हम दूसरों के लिए कितनी बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।
दूसरा आयाम है, निस्वार्थ प्रेम और समर्पण का। पति-पत्नी के रिश्ते की यह कहानी हमें यह दिखाती है कि सच्चे प्रेम और समर्पण में कोई सीमा नहीं होती। यह महिला हमें यह सिखाती है कि प्रेम केवल शब्दों में नहीं, बल्कि कर्मों में भी व्यक्त होता है।

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